Mar 30, 2012

Luke ल्यूक L24

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Mar 26, 2012

Luke ल्यूक L23

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Mar 22, 2012

Luke ल्यूक L22

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Mar 18, 2012

Luke ल्यूक L21

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Mar 16, 2012

Luke ल्यूक L18

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Mar 14, 2012

Luke ल्यूक L20

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Mar 10, 2012

Luke ल्यूक L19

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Mar 8, 2012

Luke ल्यूक L17

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Mar 4, 2012

Luke ल्यूक L16

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Feb 28, 2012

Luke ल्यूक L15

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Feb 24, 2012

Luke ल्यूक L11

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Feb 24, 2012

Luke ल्यूक L14

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Feb 20, 2012

Luke ल्यूक L13

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Feb 16, 2012

Luke ल्यूक L12

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Feb 12, 2012

Luke ल्यूक L10

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Feb 8, 2012

Luke ल्यूक L09

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Feb 4, 2012

Luke ल्यूक L08

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Feb 1, 2012

Luke ल्यूक L07

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Jan 29, 2012

Luke ल्यूक L06

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Jan 26, 2012

Luke ल्यूक L05

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Jan 20, 2012

Luke ल्यूक L04

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Jan 19, 2012

Luke ल्यूक L03

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Jan 18, 2012

Luke ल्यूक L02

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Jan 17, 2012

Luke ल्यूक L01

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Apr 3, 2011

42 Luke ल्यूक

The Gospel of Luke, written for those with a gentile background, emphasizes Jesus as the Son of Man. Luke reflects on the humanity and compassion of Jesus Christ.



एक नास्तिक व्यक्ति की पृष्ठभूमि के साथ उन लोगों के लिए लिखा ल्यूक के सुसमाचार,, मनुष्य के पुत्र के रूप में यीशु पर जोर देती है. ल्यूक यीशु मसीह की मानवता और दया को दर्शाता है.
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